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Monday, March 9, 2026
बोध कथा (आत्मविश्वास है विजय)
बोध कथा (आत्मविश्वास है विजय)
घटना है वर्ष 1960 की इटली की राजधानी रोम में ओलंपिक खेल हो रहे थे । इन खेलों में एक बीस वर्षीय बालिका भी भाग ले रही थी। वह इतनी तेज़ दौड़ी, इतनी तेज़ दौड़ी कि 1960 के ओलंपिक मुक़ाबलों में तीन स्वर्ण पदक जीत कर दुनिया की सबसे तेज़ धाविका बन गई। वह बालिका थी विल्मा रुडोल्फ । इस बालिका को चार वर्ष की आयु में डबल निमोनिया और काला बुखार होने से पोलियो हो गया और उसे पैरों में ब्रेस पहननी पड़ी। ग्यारह वर्ष की उम्र तक वह चल-फिर भी नहीं सकती थी लेकिन उसका सपना था कि उसे दुनिया की सबसे तेज़ धाविका बनना है। डॉक्टर के मना करने के बावजूद विल्मा रुडोल्फ़ ने अपने पैरों की ब्रेस उतार फेंकी और स्वयं को मानसिक रूप से तैयार कर अभ्यास में जुट गई। उसने अपने आत्मविश्वास को इतना ऊँचा कर लिया कि असंभव-सी बात पूरी कर दिखलाई।
बोध कथा (साहस)
बोध कथा (साहस)
फ्रांस का प्रसिद्ध योद्धा हुआ नेपोलियन। उसे रूस पर आक्रमण करना था। राह में ऐल्पस की दुर्गम पहाड़ियां थीं। ऐल्पस की पहाड़ियों को पार करना बहुत ही कठिन कार्य था। सेनापति ने नेपोलियन से कहा, “ सामने ऐल्पस की पहाड़ियां हैं, उन्हें कैसे पार करेंगे?” नेपोलियन ने सेनापति की बात की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और सेना को आगे बढ़ने का आदेश दिया। कुछ दिनों पश्चात नेपोलियन ने सेनापति से पूछा, “वे ऐल्पस की पहाड़ियां कहाँ हैं?” सेनापति ने सिर झुका लिया और कहा, “पीछे रह गई हैं।” यह नेपोलियन का साहस ही था जिसने पूरी सेना के साथ ऐल्पस की दुर्गम पहाड़ियों को बिना कठिनाई के पार कर लिया।
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