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Friday, July 3, 2026
कीलों की बाड़
एक गाँव में एक बालक था। वह बहुत क्रोधी था। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता और लोगों से कठोर शब्द बोल देता। उसके व्यवहार से घर वाले और मित्र सभी दुखी रहते थे।
एक दिन उसके पिता ने उसे एक थैला कीलों का दिया और कहा, "जब भी तुम्हें क्रोध आए तब घर के पीछे लगी लकड़ी की बाड़ में एक कील ठोक देना।"
पिता उसे बाड़ के पास ले गए और बोले, "देखो, कीलें के कारण बाड़ में छेद हो गए हैं , जब हम किसी को कटु वचन कहते हैं, तो उसके मन पर भी ऐसे ही घाव हो जाते हैं। बाद में चाहे हम क्षमा माँग लें, पर उन शब्दों के निशान अक्सर लंबे समय तक बने रहते हैं।"
बालक ने निश्चय किया कि वो अब गुस्सा या क्रोध नहीं करेगा ।
Thursday, May 7, 2026
बोधकथा (काँच का जार )
बोधकथा (काँच का जार )
एक बार की बात है, एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के सामने एक खाली काँच का जार क्लास में आए । प्रोफेसर ने सबसे पहले बड़े पत्थर उठाए खाली जार में डालने लगे। थोड़ी देर में जार ऊपर तक भर गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा — “क्या अब यह जार भर गया है?” सभी विद्यार्थियों ने एक स्वर में कहा — “जी सर, अब यह पूरा भर गया है।” फिर शिक्षक ने जार में कंकड़ डालने शुरू किए फिर शिक्षक ने बालू को जार में डाला । फिर उन्होंने पास रखा एक गिलास पानी उठाया और उसे भी जार में डाल दिया । शिक्षक ने कहा — “यह जार आपके जीवन का प्रतीक है। इसमें जो बड़े पत्थर हैं, वे आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें हैं — आपका परिवार, स्वास्थ्य, चरित्र । कंकड़ आपके करियर, नौकरी, भौतिक जरूरतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। और बालू (रेत) उन छोटी-छोटी चीज़ों का प्रतीक है — जैसे मनोरंजन, सोशल मीडिया, दूसरों से तुलना, या छोटी चिंताएँ।” उन्होंने आगे कहा — “अगर तुम सबसे पहले बालू जार में भर दोगे, तो पत्थरों और कंकड़ों के लिए जगह नहीं बचेगी।
“और जहाँ तक पानी का सवाल है — यह दर्शाता है कि चाहे आपका जीवन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, हमेशा एक कप चाय या कॉफी अपने दोस्तों के साथ पीने का समय निकालना चाहिए।”
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