Friday, July 3, 2026
कीलों की बाड़
एक गाँव में एक बालक था। वह बहुत क्रोधी था। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता और लोगों से कठोर शब्द बोल देता। उसके व्यवहार से घर वाले और मित्र सभी दुखी रहते थे।
एक दिन उसके पिता ने उसे एक थैला कीलों का दिया और कहा, "जब भी तुम्हें क्रोध आए तब घर के पीछे लगी लकड़ी की बाड़ में एक कील ठोक देना।"
पिता उसे बाड़ के पास ले गए और बोले, "देखो, कीलें के कारण बाड़ में छेद हो गए हैं , जब हम किसी को कटु वचन कहते हैं, तो उसके मन पर भी ऐसे ही घाव हो जाते हैं। बाद में चाहे हम क्षमा माँग लें, पर उन शब्दों के निशान अक्सर लंबे समय तक बने रहते हैं।"
बालक ने निश्चय किया कि वो अब गुस्सा या क्रोध नहीं करेगा ।
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