बोधकथा (काँच का जार )
एक बार की बात है, एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के सामने एक खाली काँच का जार क्लास में आए । प्रोफेसर ने सबसे पहले बड़े पत्थर उठाए खाली जार में डालने लगे। थोड़ी देर में जार ऊपर तक भर गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा — “क्या अब यह जार भर गया है?” सभी विद्यार्थियों ने एक स्वर में कहा — “जी सर, अब यह पूरा भर गया है।” फिर शिक्षक ने जार में कंकड़ डालने शुरू किए फिर शिक्षक ने बालू को जार में डाला । फिर उन्होंने पास रखा एक गिलास पानी उठाया और उसे भी जार में डाल दिया । शिक्षक ने कहा — “यह जार आपके जीवन का प्रतीक है। इसमें जो बड़े पत्थर हैं, वे आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज़ें हैं — आपका परिवार, स्वास्थ्य, चरित्र । कंकड़ आपके करियर, नौकरी, भौतिक जरूरतों का प्रतिनिधित्व करते हैं। और बालू (रेत) उन छोटी-छोटी चीज़ों का प्रतीक है — जैसे मनोरंजन, सोशल मीडिया, दूसरों से तुलना, या छोटी चिंताएँ।” उन्होंने आगे कहा — “अगर तुम सबसे पहले बालू जार में भर दोगे, तो पत्थरों और कंकड़ों के लिए जगह नहीं बचेगी।
“और जहाँ तक पानी का सवाल है — यह दर्शाता है कि चाहे आपका जीवन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, हमेशा एक कप चाय या कॉफी अपने दोस्तों के साथ पीने का समय निकालना चाहिए।”
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