Monday, March 9, 2026

बोध कथा (प्रतिभा की चमक)

बोध कथा (प्रतिभा की चमक)

ऋषि अंगिरा के शिष्यों में एक था उदयन। वह काफी प्रतिभाशाली था पर उसमें विनम्रता की कमी थी , ऋषि ने सोचा कि समय रहते इसे न समझाया गया तो वह लक्ष्य से भटक जाएगा। एक बार सर्दी की रात में सत्संग चल रहा था। बीच में अंगीठी में कोयले दहक रहे थे। ऋषि ने कहा, 'देखो वो सबसे बड़ा कोयला सबसे तेजस्वी है। इसे निकालकर मेरे पास रख दो’
उदयन ने चिमटे से पकड़कर वह तेज भरा अंगारा ऋषि के पास रख दिया, लेकिन जल्दी ही उसकी चमक फीकी पड़ने लगी और वह तेजस्वी अंगारा काला कोयला भर रह गया। ऋषि ने समझाया, 'देखो, तुम चाहे जितने तेजस्वी हो, पर इस कोयले जैसी भूल मत कर बैठना। यह कोयला अंगीठी में सब के साथ रहता तो अंत तक तेजस्वी बना रहता और सबको गर्मी देता रहता, पर अब तो इसकी चमक नहीं रही। उदयन को अपनी भूल का अहसास हो गया।

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