Monday, March 9, 2026
बोध कथा (आत्मविश्वास है विजय)
बोध कथा (आत्मविश्वास है विजय)
घटना है वर्ष 1960 की इटली की राजधानी रोम में ओलंपिक खेल हो रहे थे । इन खेलों में एक बीस वर्षीय बालिका भी भाग ले रही थी। वह इतनी तेज़ दौड़ी, इतनी तेज़ दौड़ी कि 1960 के ओलंपिक मुक़ाबलों में तीन स्वर्ण पदक जीत कर दुनिया की सबसे तेज़ धाविका बन गई। वह बालिका थी विल्मा रुडोल्फ । इस बालिका को चार वर्ष की आयु में डबल निमोनिया और काला बुखार होने से पोलियो हो गया और उसे पैरों में ब्रेस पहननी पड़ी। ग्यारह वर्ष की उम्र तक वह चल-फिर भी नहीं सकती थी लेकिन उसका सपना था कि उसे दुनिया की सबसे तेज़ धाविका बनना है। डॉक्टर के मना करने के बावजूद विल्मा रुडोल्फ़ ने अपने पैरों की ब्रेस उतार फेंकी और स्वयं को मानसिक रूप से तैयार कर अभ्यास में जुट गई। उसने अपने आत्मविश्वास को इतना ऊँचा कर लिया कि असंभव-सी बात पूरी कर दिखलाई।
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