बोध कथा (परनिंदा)
स्वामी सेवानंदजी के दो शिष्य थे – रामानंद और चेतनानंद । एक दिन रामानंद देर तक सोया रहा । ऐसा 3 – 4 दिन तक होता रहा । आखिर चेतनानंद गुरुजी के पास पहुँचा और कहा - ‘‘गुरुदेव ! रामानंद आजकल देर तक सोता रहता है ।” गुरुजी बोले : ‘‘अच्छा होता अगर तू भी सोया ही रहता । चेतनानंद ने आश्चर्य से कहा - ‘‘ऐसा क्यों गुरुजी ? मेरे सोने से किसको लाभ होगा ? गुरु जी ने कहा - ‘‘तुमको ही लाभ होगा । तुम परनिंदा से बचे रहोगे ।” तब चेतनानंद ने तुरंत अपनी सफाई में कहा : ‘‘मैं निंदा नहीं कर रहा हूँ गुरुजी ! मैं तो उसकी गलती बता रहा हूँ जिससे वह सुधर जाय ! गुरुजी ने कहा – तुम उससे देर तक सोने का कारण पूछते। उसे समझाते । अगर वह फिर भी नहीं मानता तब यह बात उसके सामने मुझसे बोलनी चाहिए थी ।“ उसने गुरुदेव से हृदयपूर्वक क्षमा माँगी ।
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