बोध कथा (पेंसिल से सीख)
पिता ने अपने लड़के से कहा – “मैं उम्मीद करता हूँ तुम भी बड़े होकर पेंसिल कि तरह ही बनोगे '
लड़के ने कहा – “ इसमे क्या खास है ? पिता बोले – “पेंसिल में पांच गुण हैं, जिसे अपना लो तो तुम महान बन जाओगे.' पहला : पेंसिल की तरह आपके भी पीछे एक हाथ होता है जो आपको मार्गदर्शन देता है और उस हाथ को हम ईश्वर कहते है। दूसरा: शार्पनर पेंसिल को थोड़ी देर के लिए तकलीफ पहुचाता है पर इसके बाद वो और ज्यादा अच्छा लिखती है. इसलिए तुम्हें भी दुःख और तकलीफों को सहना करना सीखना चाहिए । तीसरा: पेंसिल रबर द्वारा गलतियों को मिटाने का मौका देती है यानी गलतियाँ हो तो उसको सुधारना भी जरूरी है ।
चौथा: पेंसिल में उसकी लकड़ी से ज्यादा उसके अन्दर कि ग्रेफ़ाइट महत्वपूर्ण है, इसलिए तुम हमेशा ध्यान दो कि तुम्हारे अन्दर क्या भरा है? पांचवां: पेंसिल हमेशा निशान छोड़ जाती है, इसलिए तुम कोई भी काम चाहे वो कितना भी छोटा क्यों न हो बुद्धिमानी और एकाग्रता से करो, जिससे लोग तुम्हें याद रखें ।
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