Monday, March 9, 2026
बोध कथा (नियमितता )
बोध कथा (नियमितता )
एक बार श्री रामकृष्ण परमहंस जी ने अपने गुरु तोतापुरी महाराज जी से पूछा,
“गुरुजी, आपने तो इतनी साधना और आराधना की है। आपको ब्रह्म की प्राप्ति भी हो गयी है।
फिर अब आप प्रतिदिन आसन लगाकर क्यों बैठते हैं ? अब आपको पूजा-पाठ या अध्ययन की क्या आवश्यकता है ?”
तोतापुरी जी ने उत्तर दिया, ” अपने मन में कभी भी यह अभिमान नहीं आना चाहिए कि मैंने सब कुछ पा लिया। अपनी साधना प्रतिदिन नियमित रूप से चलती रहनी चाहिए।”
उन्होंने अपने लोटे को दिखाते हुए कहा, “रामकृष्ण ! यह लोटा इतना साफ है कि तुम इसमें अपना मुँह देख सकते हो। मैं इसे प्रतिदिन रेत से रगड़कर
माँजता हूँ। यदि ऐसा न करूँ, तो इस पर दाग पड़ जायेंगे और इसका पानी भी पीने योग्य नहीं रहेगा।
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