Monday, March 9, 2026

बोध कथा (चार मूर्ख)

               

बोध कथा (चार मूर्ख)

एक गाँव मे एक प्रसिद्ध संत का आगमन हुआ। उसी गाँव में चार मूर्ख मित्र भी निवास करते थे । संत का स्वागत सत्कार देखकर उन्होने पूछा तो पता चला कि संत ने मौन रहकर गहन तपस्या की है और कई सिद्धियों के स्वामी बने हैं । बस फिर क्या था, मूरखों ने सोचा कि सम्मान प्राप्त करने का सबसे सुगम उपाय यही है । चारों ने एक दीया लिया और जंगल मे एक अंधेरी सुनसान गुफा ढूंढकर उसमे जा बैठे । निर्णय किया कि मौन रहेंगे और सारी सिद्धियाँ मिल जाएगी थोड़ा समय ही गुजरा था कि दिये की लौ फड़फड़ाने लगी, उनमे से एक बोला, “अरे कोई दिये मे तेल डालो।“
दूसरा बोला, “बेवकूफ बाते नहीं करनी है, हमारा तो मौन है।“ तीसरा कहने लगा, “तुम दोनों मूर्ख हो, मेरी तरह चुप नहीं बैठ सकते ?” चौथा भी कहाँ शांत रहनेवाला था, वह बोला, “ सबके सब बोल रहे हैं, सिर्फ मैं ही चुप बैठा हूँ ।“

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